जिस ध्वज के आगे शीश झुकता, जिसका प्रतीक है बलिदान।
हे आर्यव्रत की भगवा ध्वज, तुझको शत-शत बार प्रणाम।
जब रवि तमस मिटाता है, विश्व भगवामय हो जाता है,
अग्नि आवेग में उठता है , लौ भगवा बन धधकता है।
मानव कर्तव्य भूल जाता है,भगवा फिर याद दिलाता है,
पूर्वज की बलिदानी गाथा, भगवा ही बोध कराता है।
गुरु गोबिंद के पताको में, भगवा ध्वज लहराती है,
रामचन्द्र की समर भूमि भी, भगवा का अभिनन्दन करती है।
महाराणा का बलिदान है भगवा, अर्जुन के रथ का साज है भगवा,
भारत का इतिहास है भगवा, ज्ञान-शील और त्याग है भगवा।
भगवा सिर्फ एक रंग नही, जीवन का नया सबेरा है।
भगवा सिर्फ एक ध्वज नही, मिटाता घोर अंधेरा है।
भगवा हमे सिखलाती है, संसार मे रख शांति-सहकार।
शक्ति-विवेक-अद्वैत का ज्ञान,भगवा की है महिमा अपार।
हे आर्यवृत की भगवा ध्वज, तुझको शत शत बार प्रणाम,
तुझसे ही है मेरा अभिमान, तुझसे ही है मेरा पहचान।
हे आर्यव्रत की भगवा ध्वज, तुझको शत-शत बार प्रणाम।
जब रवि तमस मिटाता है, विश्व भगवामय हो जाता है,
अग्नि आवेग में उठता है , लौ भगवा बन धधकता है।
मानव कर्तव्य भूल जाता है,भगवा फिर याद दिलाता है,
पूर्वज की बलिदानी गाथा, भगवा ही बोध कराता है।
गुरु गोबिंद के पताको में, भगवा ध्वज लहराती है,
रामचन्द्र की समर भूमि भी, भगवा का अभिनन्दन करती है।
महाराणा का बलिदान है भगवा, अर्जुन के रथ का साज है भगवा,
भारत का इतिहास है भगवा, ज्ञान-शील और त्याग है भगवा।
भगवा सिर्फ एक रंग नही, जीवन का नया सबेरा है।
भगवा सिर्फ एक ध्वज नही, मिटाता घोर अंधेरा है।
भगवा हमे सिखलाती है, संसार मे रख शांति-सहकार।
शक्ति-विवेक-अद्वैत का ज्ञान,भगवा की है महिमा अपार।
हे आर्यवृत की भगवा ध्वज, तुझको शत शत बार प्रणाम,
तुझसे ही है मेरा अभिमान, तुझसे ही है मेरा पहचान।